Friday, 6 January 2012

शाम की किरन सा वो ...


शाम की किरन सा वो
मेरे साथ चल रहा है..

कहीं दूर फिजाओं में उसका अक्स सा है..
पलकों और जुल्फों के बीच एक रिश्ता सा कायम है..

सूरज डूबता हुआ जैसे ..
किसी के पास होने का पैगाम दे रहा है,


शाम की किरन सा वो
मेरे साथ चल रहा है..

हल्की-हल्की सी बारिश  में रंग भरने आया है..
कहीं दूर आसमा में उसका चेहरा बन रहा है


शाम की किरन सा वो
मेरे साथ चल रहा है..


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