Pari Tales
Saturday, 14 January 2012
ये फासलें ..4
मुझे नहीं पता !! जिंदगी मुझे कहाँ ले जा रही है?
मुझे तलाश है उसकी ,जिसके बिना ये सफ़र अधूरा है..
कभी कभी डर लगता हैं इन ख्वाबो से,
कहीं भागते- भागते,उसकी तलाश में,
मैं कहीं तनहा न रह जाऊं....
आगे कोई हैं या नहीं क्या पता ?
सूनी-सूनी सी डगर लगती हैं..
जिसकी हैं तलाश मुझे,
कहीं
वो मेरे साथ तो नहीं..
जिंदगी कहती हैं ,एक दिन ये नज़र उसे पहचान ही लेगी..
1 comment:
Seema
18 January 2012 at 01:58
assure yr
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बदसुलूकी
ये फ़ासलें..
ख़ामोशी में वो बनके आवाज रहा करता हैं, मेरे आँखों मैं उसके ख्वाबों का, एक जहान बसा करता हैं.. तन्हाई में अक्सर, कोई मेरा नाम लिया करता...
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assure yr
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