Tuesday, 2 August 2016

उसकी मुहब्बत...1



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यकीं है मुझे उसकी हर कही-अनकही पर
फिर भी एक इंतज़ार सा रहता है ,
"उसकी मुहब्बत जाहिर करने का"



दीवानगी










<Post: 163*>

खफा नहीं जब ,तो ये नाराज़गी क्यों है
खूबसूरत सी दिखती, ये सादगी क्यों है
कैसा है ये जश्न के धड़कने शोर मचा रही है...
इश्क़ नहीं जब, तो ये दीवानगी क्यों है




बदसुलूकी