Pari Tales
Tuesday, 16 December 2014
निर्भया !!!!
" ख्वाबों की गली सी थी
फूलों की कली सी थी
कुदरत के रंगो में घुली सी थी
कभी तोडा उसको
तो कभी मसल के फेंक दिया
बिखर गयी जब पंखुड़ियाँ
राह में तनहा छोड़ दिया
मौजूद है आज भी वो कहीं, इन हवाओ में
साँसों ने ही, बस साथ उसका .. छोड़ दिया "
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
बदसुलूकी
ये फ़ासलें..
ख़ामोशी में वो बनके आवाज रहा करता हैं, मेरे आँखों मैं उसके ख्वाबों का, एक जहान बसा करता हैं.. तन्हाई में अक्सर, कोई मेरा नाम लिया करता...
तुम भी जा रहे हो अब
सच ही कहा है किसी ने .. नहीं यहाँ किसी का ठिकाना तुम भी जा रहे हो अब करके नया एक बहाना... चाहा उन्हें शामो शेहेर...
अनकही उलझन
कभी कसमों तो कभी वादों से डर लगता हैं निहार के आस्मा की ऊचाईयों को..छूने का दिल करता हैं ! हैं तमन्ना वो खुद ही एक दफा पहेल करे.. कभ...
No comments:
Post a Comment