Pari Tales
Tuesday, 22 October 2013
ये सांसें
post- 137*
थाम लेगा वो , तब भी मैं..
रस्में-मोहब्बत हार ही जाउंगी
सहम जाते ही उसके ,
और धीमी होती जाएगी , ये सांसें मेरी ...
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बदसुलूकी
ये फ़ासलें..
ख़ामोशी में वो बनके आवाज रहा करता हैं, मेरे आँखों मैं उसके ख्वाबों का, एक जहान बसा करता हैं.. तन्हाई में अक्सर, कोई मेरा नाम लिया करता...
तुम भी जा रहे हो अब
सच ही कहा है किसी ने .. नहीं यहाँ किसी का ठिकाना तुम भी जा रहे हो अब करके नया एक बहाना... चाहा उन्हें शामो शेहेर...
अनकही उलझन
कभी कसमों तो कभी वादों से डर लगता हैं निहार के आस्मा की ऊचाईयों को..छूने का दिल करता हैं ! हैं तमन्ना वो खुद ही एक दफा पहेल करे.. कभ...
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